Class 9 History Revision Notes
फ्रांसीसी क्रांति
Revise the NCERT Class 9 History chapter, फ्रांसीसी क्रांति , with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 9 History फ्रांसीसी क्रांति Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.
Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | History |
| Chapter Name | फ्रांसीसी क्रांति |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
फ्रांसीसी क्रांति Revision Notes
1. फ्रांसीसी क्रांति क्या थी?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति 1789 से 1799 के बीच फ्रांस में हुई एक महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्रांति थी। इस क्रांति के द्वारा निरंकुश राजतंत्र तथा सामंती व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया गया। जनता ने समान अधिकार, स्वतंत्रता और बंधुत्व की माँग की। इस क्रांति के परिणामस्वरूप फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना हुई तथा नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार प्राप्त हुए। इस क्रांति ने केवल फ्रांस ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की राजनीति, समाज और लोकतांत्रिक विचारधारा को गहराई से प्रभावित किया। इसलिए फ्रांसीसी क्रांति को विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।
(i) फ्रांसीसी क्रांति 1789 में प्रारम्भ हुई।
(ii) इसका उद्देश्य राजशाही और सामंती व्यवस्था का अंत करना था।
(iii) इसने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का संदेश दिया।
(iv) फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना हुई।
(v) इस क्रांति का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा।
2. फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति के पीछे अनेक कारण थे। सामाजिक व्यवस्था में असमानता थी, जहाँ प्रथम और द्वितीय एस्टेट को विशेषाधिकार प्राप्त थे, जबकि तीसरे एस्टेट पर करों का पूरा बोझ था। फ्रांस की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब थी और राजकोष खाली हो चुका था। राजा लुई सोलहवें की कमजोर नीतियाँ, बढ़ता कर्ज, महँगाई, खराब फसलें तथा जनता की दयनीय स्थिति ने असंतोष को बढ़ाया। जॉन लॉक, रूसो और मॉन्तेस्क्यू जैसे दार्शनिकों के विचारों ने भी जनता को स्वतंत्रता और समान अधिकारों के लिए प्रेरित किया। अंततः 1789 में एस्टेट्स जेनराल की बैठक क्रांति का तात्कालिक कारण बनी।
(i) सामाजिक असमानता प्रमुख कारण थी।
(ii) आर्थिक संकट और खाली राजकोष ने स्थिति बिगाड़ी।
(iii) राजा लुई XVI की नीतियाँ असफल रहीं।
(iv) दार्शनिकों के विचारों ने जनता को प्रेरित किया।
(v) एस्टेट्स जेनराल की बैठक तात्कालिक कारण बनी।
3. फ्रांसीसी समाज की वर्ग-व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ अठारहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेटों में विभाजित था। प्रथम एस्टेट में पादरी वर्ग था, जिसे करों से छूट प्राप्त थी। द्वितीय एस्टेट में कुलीन वर्ग शामिल था, जिसे अनेक सामंती विशेषाधिकार प्राप्त थे। तृतीय एस्टेट में व्यापारी, किसान, मजदूर, कारीगर, वकील तथा अन्य सामान्य नागरिक आते थे। यही वर्ग सबसे अधिक कर देता था, जबकि उसे कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं था। समाज की यही असमान व्यवस्था जनता में असंतोष का प्रमुख कारण बनी और आगे चलकर फ्रांसीसी क्रांति का आधार बनी।
| एस्टेट | प्रमुख वर्ग | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रथम | पादरी | करों से छूट |
| द्वितीय | कुलीन | सामंती विशेषाधिकार |
| तृतीय | किसान, व्यापारी, मजदूर आदि | सभी करों का बोझ |
(i) समाज तीन एस्टेटों में विभाजित था।
(ii) प्रथम एस्टेट में पादरी वर्ग था।
(iii) द्वितीय एस्टेट में कुलीन वर्ग था।
(iv) तृतीय एस्टेट पर करों का बोझ था।
(v) सामाजिक असमानता क्रांति का कारण बनी।
4. प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय एस्टेट में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था में तीनों एस्टेटों की स्थिति अलग-अलग थी। प्रथम एस्टेट में पादरी वर्ग था, जिसे धार्मिक एवं कर संबंधी विशेषाधिकार प्राप्त थे। द्वितीय एस्टेट में कुलीन वर्ग था, जो किसानों से सामंती कर वसूलता था। तृतीय एस्टेट में समाज का सबसे बड़ा वर्ग था, जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी और कारीगर शामिल थे। इन्हें कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं था तथा सभी प्रकार के कर इन्हीं को देने पड़ते थे। इसी असमानता ने जनता में क्रांति की भावना उत्पन्न की।
| आधार | प्रथम एस्टेट | द्वितीय एस्टेट | तृतीय एस्टेट |
|---|---|---|---|
| सदस्य | पादरी | कुलीन | सामान्य जनता |
| कर | छूट | छूट | सभी कर देते थे |
| विशेषाधिकार | अधिक | अधिक | कोई नहीं |
(i) प्रथम एस्टेट में पादरी थे।
(ii) द्वितीय एस्टेट में कुलीन थे।
(iii) तृतीय एस्टेट में सामान्य जनता थी।
(iv) केवल तृतीय एस्टेट कर देता था।
(v) यही असमानता क्रांति का कारण बनी।
5. राजा लुई सोलहवें (Louis XVI) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ राजा लुई सोलहवाँ 1774 ई. में फ्रांस का शासक बना। उस समय उसकी आयु लगभग 20 वर्ष थी। उसकी पत्नी ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी एन्तोआनेत थी। शासन संभालते समय उसने राजकोष को खाली पाया, परंतु उसने आर्थिक संकट दूर करने के बजाय दरबार की फिजूलखर्ची को नहीं रोका। उसकी कमजोर नीतियाँ, निर्णय लेने में असफलता तथा जनता की समस्याओं की अनदेखी के कारण फ्रांस में असंतोष बढ़ता गया। अंततः फ्रांसीसी क्रांति के दौरान उसे देशद्रोह का दोषी ठहराकर 21 जनवरी 1793 को मृत्युदंड दिया गया।
(i) 1774 में फ्रांस का राजा बना।
(ii) उसकी पत्नी मेरी एन्तोआनेत थी।
(iii) शासनकाल में आर्थिक संकट था।
(iv) उसकी नीतियाँ असफल रहीं।
(v) 1793 में उसे मृत्युदंड दिया गया।
6. किसानों की स्थिति फ्रांसीसी क्रांति से पहले कैसी थी?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति से पहले किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। फ्रांस की लगभग 90 प्रतिशत आबादी किसानों की थी, लेकिन बहुत कम किसान अपनी भूमि के मालिक थे। अधिकांश भूमि पर कुलीनों, चर्च तथा तीसरे एस्टेट के धनी लोगों का अधिकार था। किसानों को अपने स्वामी के खेतों में बेगार करना पड़ता था तथा सैन्य सेवा और सड़क निर्माण जैसे कार्य भी करने पड़ते थे। इसके अतिरिक्त उन्हें टाइल (प्रत्यक्ष कर), टाइद (धार्मिक कर), सामंती कर तथा नमक और तंबाकू जैसी वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर भी देना पड़ता था। भारी करों और सामाजिक भेदभाव के कारण किसानों का जीवन अत्यंत कठिन था। यही असंतोष आगे चलकर फ्रांसीसी क्रांति का एक प्रमुख कारण बना।
(i) लगभग 90% आबादी किसान थी।
(ii) अधिकांश किसानों के पास अपनी भूमि नहीं थी।
(iii) किसानों पर अनेक प्रकार के कर लगाए जाते थे।
(iv) बेगार एवं सामंती सेवाएँ करनी पड़ती थीं।
(v) किसानों का असंतोष क्रांति का प्रमुख कारण बना।
7. फ्रांस की कर प्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी समाज में कर व्यवस्था अत्यंत असमान थी। प्रथम और द्वितीय एस्टेट को अधिकांश करों से छूट प्राप्त थी, जबकि तीसरे एस्टेट पर सभी प्रकार के करों का बोझ था। किसानों को राज्य को टाइल (Taille) नामक प्रत्यक्ष कर देना पड़ता था। चर्च को टाइद (Tithe) के रूप में कृषि उपज का लगभग दसवाँ भाग देना होता था। इसके अतिरिक्त कुलीनों को सामंती कर तथा नमक और तंबाकू जैसी वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर भी देना पड़ता था। इस असमान कर व्यवस्था ने सामान्य जनता में असंतोष उत्पन्न किया और यही व्यवस्था फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारणों में से एक बनी।
| कर | किसे दिया जाता था |
|---|---|
| टाइल (Taille) | राज्य को |
| टाइद (Tithe) | चर्च को |
| सामंती कर | कुलीनों को |
| अप्रत्यक्ष कर | नमक, तंबाकू आदि पर |
(i) करों का बोझ केवल तीसरे एस्टेट पर था।
(ii) टाइल राज्य को दिया जाता था।
(iii) टाइद चर्च को दिया जाता था।
(iv) सामंती कर कुलीनों को देना पड़ता था।
(v) असमान कर व्यवस्था क्रांति का कारण बनी।
8. फ्रांस की आर्थिक स्थिति फ्रांसीसी क्रांति से पहले कैसी थी?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति से पहले फ्रांस की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब थी। लंबे युद्धों, वर्साय के राजमहल की शानो-शौकत तथा अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में सहायता देने के कारण सरकार पर भारी कर्ज हो गया था। राजकोष लगभग खाली हो चुका था और सरकार को कर्ज पर ऊँचा ब्याज देना पड़ता था। सरकारी आय का बड़ा भाग केवल कर्ज चुकाने में खर्च हो जाता था। सेना, प्रशासन तथा अन्य सरकारी कार्यों के लिए धन की कमी थी। इस संकट से निकलने के लिए सरकार ने कर बढ़ाने का प्रयास किया, जिसका पूरा बोझ तीसरे एस्टेट पर पड़ा। इससे जनता में असंतोष और अधिक बढ़ गया।
(i) फ्रांस पर भारी कर्ज था।
(ii) राजकोष लगभग खाली था।
(iii) राजदरबार में अत्यधिक फिजूलखर्ची होती थी।
(iv) करों का बोझ जनता पर बढ़ा।
(v) आर्थिक संकट क्रांति का प्रमुख कारण बना।
9. जीविका संकट (Subsistence Crisis) क्या था?
उत्तर ⇒ जब किसी देश में लोगों के लिए भोजन एवं रोजगार की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है, तो उसे जीविका संकट कहा जाता है। फ्रांस में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी, जबकि अनाज का उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ पाया। परिणामस्वरूप रोटी की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। सूखा, ओलावृष्टि तथा खराब फसल के कारण अनाज की कमी हो गई। दूसरी ओर मजदूरी महँगाई के अनुसार नहीं बढ़ रही थी, जिससे गरीब जनता का जीवन अत्यंत कठिन हो गया। इन परिस्थितियों ने जनता में असंतोष और अन्याय की भावना को बढ़ाया तथा फ्रांसीसी क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।
(i) भोजन एवं रोजगार की कमी को जीविका संकट कहते हैं।
(ii) जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी।
(iii) अनाज की कीमतों में वृद्धि हुई।
(iv) मजदूरी महँगाई के अनुसार नहीं बढ़ी।
(v) इससे जनता में असंतोष बढ़ा।
10. फ्रांस में मध्य वर्ग (Middle Class) का उदय कैसे हुआ?
उत्तर ⇒ अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में एक नए सामाजिक वर्ग का उदय हुआ, जिसे मध्य वर्ग कहा गया। इस वर्ग में व्यापारी, उद्योगपति, वकील, चिकित्सक तथा प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इन लोगों ने व्यापार, उद्योग एवं व्यवसाय के माध्यम से संपत्ति अर्जित की थी। मध्य वर्ग के लोग शिक्षित थे और जॉन लॉक, रूसो तथा मॉन्तेस्क्यू जैसे दार्शनिकों के विचारों से प्रभावित थे। वे जन्म के आधार पर विशेषाधिकारों का विरोध करते थे तथा योग्यता, समानता, स्वतंत्रता और समान अवसर की माँग करते थे। इसी वर्ग ने फ्रांसीसी क्रांति के विचारों को जनता तक पहुँचाने और क्रांति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) मध्य वर्ग का उदय अठारहवीं शताब्दी में हुआ।
(ii) इसमें व्यापारी, वकील एवं उद्योगपति शामिल थे।
(iii) यह वर्ग शिक्षित एवं संपन्न था।
(iv) दार्शनिकों के विचारों से प्रभावित था।
(v) इस वर्ग ने फ्रांसीसी क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
11. जॉन लॉक (John Locke) के विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ जॉन लॉक अठारहवीं शताब्दी के प्रमुख राजनीतिक दार्शनिकों में से एक थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘टू ट्रीटाइजेज ऑफ गवर्नमेंट (Two Treatises of Government)’ में राजा के दैवी एवं निरंकुश अधिकारों का विरोध किया। उनका मानना था कि किसी भी सरकार की शक्ति जनता की सहमति से प्राप्त होती है, न कि ईश्वर द्वारा दिए गए अधिकार से। यदि शासक जनता के अधिकारों का उल्लंघन करे, तो जनता को उसे बदलने का अधिकार है। उनके विचारों ने स्वतंत्रता, समानता और लोकतंत्र की भावना को मजबूत किया तथा फ्रांसीसी क्रांति के नेताओं और मध्य वर्ग को गहराई से प्रभावित किया।
(i) जॉन लॉक प्रसिद्ध राजनीतिक दार्शनिक थे।
(ii) उन्होंने राजा के निरंकुश अधिकारों का विरोध किया।
(iii) जनता की सहमति से शासन का समर्थन किया।
(iv) लोकतंत्र के सिद्धांत को बढ़ावा दिया।
(v) उनके विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति को प्रभावित किया।
12. जाँ जाक रूसो (Jean Jacques Rousseau) के विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ जाँ जाक रूसो फ्रांस के महान दार्शनिक थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द सोशल कॉन्ट्रैक्ट (The Social Contract)’ में सामाजिक अनुबंध का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार राज्य की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है और सरकार को जनता की इच्छा के अनुसार कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और जनसत्ता पर आधारित शासन व्यवस्था का समर्थन किया। रूसो का मानना था कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं और किसी को जन्म के आधार पर विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए। उनके विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति की विचारधारा को मजबूत आधार प्रदान किया।
(i) रूसो ने ‘द सोशल कॉन्ट्रैक्ट’ पुस्तक लिखी।
(ii) उन्होंने सामाजिक अनुबंध का सिद्धांत दिया।
(iii) जनता को सर्वोच्च शक्ति माना।
(iv) समानता और स्वतंत्रता का समर्थन किया।
(v) उनके विचार क्रांति के प्रेरणास्रोत बने।
13. मॉन्तेस्क्यू (Montesquieu) के विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ मॉन्तेस्क्यू फ्रांस के प्रसिद्ध दार्शनिक एवं राजनीतिक विचारक थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द स्पिरिट ऑफ लॉज़ (The Spirit of Laws)’ में शासन की शक्तियों के विभाजन का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार शासन की शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथ में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बीच सत्ता का विभाजन करने का सुझाव दिया ताकि किसी भी शासक द्वारा निरंकुश शासन स्थापित न किया जा सके। बाद में यही सिद्धांत अनेक लोकतांत्रिक देशों के संविधान का महत्वपूर्ण आधार बना और फ्रांसीसी क्रांति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
(i) मॉन्तेस्क्यू ने सत्ता विभाजन का सिद्धांत दिया।
(ii) उन्होंने ‘द स्पिरिट ऑफ लॉज़’ पुस्तक लिखी।
(iii) शासन की तीन शाखाओं का समर्थन किया।
(iv) निरंकुश शासन का विरोध किया।
(v) उनके विचार आधुनिक लोकतंत्र का आधार बने।
14. एस्टेट्स जेनराल (Estates General) क्या था?
उत्तर ⇒ एस्टेट्स जेनराल फ्रांस की एक राजनीतिक संस्था थी, जिसमें समाज के तीनों एस्टेटों—पादरी, कुलीन तथा सामान्य जनता—के प्रतिनिधि शामिल होते थे। फ्रांस का राजा अपनी इच्छा से नया कर नहीं लगा सकता था। इसके लिए उसे एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलानी पड़ती थी। इसकी अंतिम बैठक 1614 में हुई थी और उसके बाद 5 मई 1789 को राजा लुई सोलहवें ने नए करों की स्वीकृति के लिए पुनः इसकी बैठक बुलाई। इसी बैठक में तीसरे एस्टेट ने समान मतदान की माँग की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। यही घटना आगे चलकर फ्रांसीसी क्रांति का तात्कालिक कारण बनी।
(i) एस्टेट्स जेनराल एक राजनीतिक संस्था थी।
(ii) इसमें तीनों एस्टेटों के प्रतिनिधि होते थे।
(iii) कर लगाने के लिए इसकी स्वीकृति आवश्यक थी।
(iv) 5 मई 1789 को इसकी बैठक हुई।
(v) यही बैठक क्रांति का तात्कालिक कारण बनी।
15. एस्टेट्स जेनराल की बैठक (5 मई 1789) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 5 मई 1789 को राजा लुई सोलहवें ने वर्साय में एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलाई। इस बैठक का उद्देश्य नए करों को स्वीकृति दिलाना था। प्रथम और द्वितीय एस्टेट के 300-300 प्रतिनिधि तथा तृतीय एस्टेट के 600 प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। पुराने नियमों के अनुसार प्रत्येक एस्टेट को केवल एक मत प्राप्त था, जबकि तीसरे एस्टेट ने प्रत्येक सदस्य को एक मत देने की माँग की। राजा ने इस लोकतांत्रिक माँग को अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधि सभा से बाहर निकल गए, जिससे फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत हुई।
(i) बैठक 5 मई 1789 को वर्साय में हुई।
(ii) इसका उद्देश्य नए करों की स्वीकृति था।
(iii) तीसरे एस्टेट ने समान मतदान की माँग की।
(iv) राजा ने माँग अस्वीकार कर दी।
(v) यहीं से क्रांति की शुरुआत हुई।
16. नैशनल असेंबली (National Assembly) की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर ⇒ एस्टेट्स जेनराल की बैठक में तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों ने माँग की कि मतदान प्रत्येक सदस्य के आधार पर कराया जाए, ताकि सभी प्रतिनिधियों को समान अधिकार मिल सके। राजा लुई सोलहवें ने इस माँग को अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधि सभा से बाहर निकल गए और 20 जून 1789 को वर्साय के टेनिस कोर्ट में स्वयं को नैशनल असेंबली घोषित कर दिया। उन्होंने शपथ ली कि जब तक फ्रांस के लिए नया संविधान तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अलग नहीं होंगे। इस घटना ने फ्रांसीसी क्रांति को नई दिशा दी और राजशाही की निरंकुश शक्ति को चुनौती दी।
(i) नैशनल असेंबली की स्थापना 20 जून 1789 को हुई।
(ii) इसका गठन तीसरे एस्टेट ने किया।
(iii) टेनिस कोर्ट में इसकी घोषणा की गई।
(iv) संविधान बनने तक कार्य जारी रखने की शपथ ली गई।
(v) इसने राजशाही को चुनौती दी।
17. टेनिस कोर्ट शपथ (Tennis Court Oath) क्या थी?
उत्तर ⇒ 20 जून 1789 को तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों को सभा भवन में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके बाद वे वर्साय के एक टेनिस कोर्ट में एकत्र हुए और ऐतिहासिक शपथ ली कि जब तक फ्रांस के लिए नया संविधान तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अलग नहीं होंगे। इस घटना को टेनिस कोर्ट शपथ कहा जाता है। इस आंदोलन का नेतृत्व मिराब्यो और आबे सिए जैसे नेताओं ने किया। इस शपथ ने फ्रांस में जनता की राजनीतिक शक्ति को मजबूत किया तथा लोकतांत्रिक शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
(i) टेनिस कोर्ट शपथ 20 जून 1789 को ली गई।
(ii) तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों ने शपथ ली।
(iii) संविधान बनने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
(iv) मिराब्यो और आबे सिए ने नेतृत्व किया।
(v) यह फ्रांसीसी क्रांति की महत्वपूर्ण घटना थी।
18. बास्तील के पतन (14 जुलाई 1789) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 14 जुलाई 1789 को पेरिस की जनता ने बास्तील किले पर हमला कर दिया। उस समय जनता महँगाई, खाद्यान्न संकट और राजा की दमनकारी नीतियों से परेशान थी। लोगों को यह भी भय था कि राजा सेना के बल पर क्रांति को दबा देगा। बास्तील किला निरंकुश राजशाही और अत्याचार का प्रतीक माना जाता था। जनता ने किले पर कब्ज़ा कर लिया और वहाँ के हथियार अपने अधिकार में ले लिए। इस घटना ने पूरे फ्रांस में क्रांति की लहर फैला दी। आज भी 14 जुलाई को फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस (Bastille Day) के रूप में मनाया जाता है।
(i) बास्तील पर हमला 14 जुलाई 1789 को हुआ।
(ii) यह राजशाही के अत्याचार का प्रतीक था।
(iii) जनता ने किले पर कब्ज़ा कर लिया।
(iv) इससे क्रांति पूरे फ्रांस में फैल गई।
(v) 14 जुलाई फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस है।
19. ग्रामीण क्षेत्रों में विद्रोह क्यों हुआ?
उत्तर ⇒ बास्तील के पतन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में यह अफवाह फैल गई कि जागीरदार किसानों की फसलें नष्ट करने के लिए लुटेरों को भेज रहे हैं। इससे किसानों में भय और आक्रोश फैल गया। किसानों ने अनेक जागीरों और किलों पर हमला किया, अनाज के भंडार लूट लिए तथा लगान और सामंती अधिकारों से संबंधित दस्तावेज़ जला दिए। कई कुलीन अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़कर भाग गए। इस ग्रामीण विद्रोह ने सामंती व्यवस्था को कमजोर कर दिया और राष्ट्रीय सभा पर सुधार लागू करने का दबाव बढ़ा।
(i) किसानों में अफवाह से भय फैल गया।
(ii) किसानों ने जागीरों पर हमला किया।
(iii) सामंती दस्तावेज़ जला दिए गए।
(iv) कई कुलीन देश छोड़कर भाग गए।
(v) सामंती व्यवस्था कमजोर हुई।
20. 4 अगस्त 1789 के निर्णयों का महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ 4 अगस्त 1789 की रात राष्ट्रीय सभा ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए फ्रांस की सामंती व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की। किसानों से वसूले जाने वाले सामंती कर और बंधनों को समाप्त कर दिया गया। पादरी वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त किए गए तथा टाइद (धार्मिक कर) को भी समाप्त कर दिया गया। चर्च की संपत्ति सरकार के अधिकार में ले ली गई। इन निर्णयों से सदियों पुरानी सामाजिक असमानता को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यही कारण है कि 4 अगस्त 1789 का निर्णय फ्रांसीसी क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
(i) सामंती व्यवस्था समाप्त की गई।
(ii) टाइद कर समाप्त हुआ।
(iii) पादरी वर्ग के विशेषाधिकार खत्म हुए।
(iv) चर्च की संपत्ति जब्त की गई।
(v) सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
21. नेशनल असेंबली का उद्देश्य क्या था?
उत्तर ⇒ नेशनल असेंबली का मुख्य उद्देश्य फ्रांस में राजा की निरंकुश सत्ता को समाप्त करके संविधान पर आधारित शासन व्यवस्था स्थापित करना था। इसके सदस्य चाहते थे कि शासन की सारी शक्तियाँ केवल राजा के हाथ में न रहकर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच विभाजित हों। असेंबली ने जनता के अधिकारों की रक्षा, कर व्यवस्था में सुधार तथा सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इसी के प्रयासों से 1791 का संविधान तैयार हुआ, जिसने फ्रांस को संवैधानिक राजतंत्र का स्वरूप प्रदान किया। इस प्रकार नेशनल असेंबली ने लोकतांत्रिक शासन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) राजा की शक्तियों को सीमित करना इसका मुख्य उद्देश्य था।
(ii) संविधान आधारित शासन स्थापित करना चाहती थी।
(iii) सत्ता का विभाजन सुनिश्चित किया गया।
(iv) नागरिक अधिकारों की रक्षा पर बल दिया गया।
(v) 1791 के संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
22. 1791 के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ 1791 का संविधान फ्रांसीसी क्रांति की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि था। इस संविधान द्वारा फ्रांस में संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना की गई। राजा की शक्तियों को सीमित कर शासन की शक्तियों का विभाजन विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में किया गया। कानून बनाने का अधिकार नेशनल असेंबली को दिया गया। संविधान के अनुसार नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार प्रदान किए गए, लेकिन मतदान का अधिकार केवल सक्रिय नागरिकों को मिला। इस संविधान का उद्देश्य निरंकुश शासन को समाप्त कर कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना था।
(i) 1791 में संविधान लागू हुआ।
(ii) संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई।
(iii) सत्ता का विभाजन किया गया।
(iv) कानून बनाने का अधिकार नेशनल असेंबली को मिला।
(v) राजा की शक्तियाँ सीमित कर दी गईं।
23. 1791 के संविधान में सत्ता का विभाजन कैसे किया गया?
उत्तर ⇒ 1791 के संविधान के अनुसार शासन की शक्तियों को तीन भागों में विभाजित किया गया। विधायिका (Legislature) को कानून बनाने का अधिकार दिया गया, जिसका कार्य नेशनल असेंबली करती थी। कार्यपालिका (Executive) का कार्य कानूनों को लागू करना था, जिसकी जिम्मेदारी राजा और उसके मंत्रियों पर थी। न्यायपालिका (Judiciary) को स्वतंत्र रखा गया, ताकि न्याय निष्पक्ष रूप से दिया जा सके। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति के हाथ में पूरी सत्ता केंद्रित होने से रोकना था। यह सिद्धांत मॉन्तेस्क्यू के विचारों पर आधारित था और आधुनिक लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता माना जाता है।
| शक्ति | कार्य |
|---|---|
| विधायिका | कानून बनाना |
| कार्यपालिका | कानून लागू करना |
| न्यायपालिका | न्याय प्रदान करना |
(i) शासन की शक्तियाँ तीन भागों में बाँटी गईं।
(ii) विधायिका कानून बनाती थी।
(iii) कार्यपालिका कानून लागू करती थी।
(iv) न्यायपालिका स्वतंत्र थी।
(v) निरंकुश शासन पर रोक लगी।
24. सक्रिय (Active) एवं निष्क्रिय (Passive) नागरिकों में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ 1791 के संविधान में सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार नहीं दिए गए थे। केवल 25 वर्ष या उससे अधिक आयु के वे पुरुष, जो कम-से-कम तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर देते थे, सक्रिय नागरिक कहलाते थे और उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त था। महिलाएँ तथा वे पुरुष जो निर्धारित कर नहीं देते थे, निष्क्रिय नागरिक कहलाते थे। उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया गया। इस व्यवस्था के कारण समाज में राजनीतिक असमानता बनी रही, जिसकी बाद में व्यापक आलोचना हुई।
| आधार | सक्रिय नागरिक | निष्क्रिय नागरिक |
|---|---|---|
| मतदान का अधिकार | था | नहीं था |
| आयु | 25 वर्ष या अधिक | सभी अन्य |
| कर | निर्धारित कर देते थे | कर नहीं देते थे |
(i) सक्रिय नागरिकों को मतदान का अधिकार था।
(ii) निष्क्रिय नागरिक मतदान नहीं कर सकते थे।
(iii) महिलाओं को सक्रिय नागरिक नहीं माना गया।
(iv) कर देना आवश्यक शर्त थी।
(v) यह व्यवस्था समानता के सिद्धांत के विरुद्ध थी।
25. ‘पुरुष एवं नागरिक अधिकार घोषणापत्र’ (Declaration of the Rights of Man and Citizen) का महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ 1791 के संविधान की शुरुआत ‘पुरुष एवं नागरिक अधिकार घोषणापत्र’ से हुई। इस घोषणापत्र में जीवन का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के समक्ष समानता तथा स्वतंत्रता जैसे अधिकारों को प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार माना गया। इसमें कहा गया कि इन अधिकारों को किसी से छीना नहीं जा सकता तथा राज्य का कर्तव्य है कि वह इनकी रक्षा करे। इस घोषणापत्र ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और समानता की भावना को मजबूत किया। बाद में विश्व के अनेक देशों के संविधान और मानवाधिकार संबंधी घोषणाओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
(i) नागरिकों के मौलिक अधिकार घोषित किए गए।
(ii) कानून के समक्ष समानता पर बल दिया गया।
(iii) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।
(iv) राज्य को अधिकारों की रक्षा का दायित्व दिया गया।
(v) आधुनिक मानवाधिकारों की नींव बनी।
26. राजनीतिक प्रतीकों (Political Symbols) का क्या महत्व था?
उत्तर ⇒ अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस के अधिकांश लोग अशिक्षित थे, इसलिए क्रांति के विचारों को जनता तक पहुँचाने के लिए चित्रों और प्रतीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से स्वतंत्रता, समानता, न्याय और एकता जैसे विचारों को सरल रूप में समझाया जाता था। टूटी हुई जंजीर स्वतंत्रता का प्रतीक थी, जबकि त्रिभुज के भीतर चमकती आँख ज्ञान और जागरूकता का प्रतीक मानी जाती थी। छड़ों का बँधा हुआ गट्ठर एकता की शक्ति को दर्शाता था और राजदंड शाही सत्ता का प्रतीक था। इन प्रतीकों ने क्रांतिकारी विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और लोगों को जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) प्रतीकों से जनता को क्रांति के विचार समझाए गए।
(ii) अधिकांश लोग अशिक्षित होने के कारण चित्रों का उपयोग किया गया।
(iii) प्रत्येक प्रतीक का विशेष अर्थ था।
(iv) प्रतीकों ने जनजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(v) स्वतंत्रता और समानता का संदेश फैलाया गया।
27. टूटी हुई जंजीर, राजदंड तथा छड़ों के गट्ठर का क्या अर्थ था?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति के दौरान विभिन्न राजनीतिक प्रतीकों का विशेष महत्व था। टूटी हुई जंजीर गुलामी से मुक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक थी। राजदंड राजा की शक्ति और शाही शासन का प्रतीक माना जाता था। छड़ों का बँधा हुआ गट्ठर यह संदेश देता था कि एकता में शक्ति होती है, क्योंकि एक अकेली छड़ी आसानी से टूट सकती है, जबकि गट्ठर को तोड़ना कठिन होता है। इन प्रतीकों के माध्यम से जनता को स्वतंत्रता, समानता, एकता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश दिया गया। ये प्रतीक फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों को लोकप्रिय बनाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुए।
| प्रतीक | अर्थ |
|---|---|
| टूटी हुई जंजीर | स्वतंत्रता |
| राजदंड | शाही सत्ता |
| छड़ों का गट्ठर | एकता में शक्ति |
(i) टूटी हुई जंजीर स्वतंत्रता का प्रतीक थी।
(ii) राजदंड राजशाही का प्रतीक था।
(iii) छड़ों का गट्ठर एकता का संदेश देता था।
(iv) प्रतीकों से जनता को शिक्षित किया गया।
(v) इनका उपयोग क्रांति के प्रचार में हुआ।
28. फ्रांस में राजतंत्र का अंत कैसे हुआ?
उत्तर ⇒ 1792 में फ्रांस ने प्रशा और ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की। युद्ध, महँगाई और खाद्यान्न संकट के कारण जनता में असंतोष बढ़ गया। 10 अगस्त 1792 को जैकोबिनों और पेरिस की जनता ने ट्यूलरी महल पर हमला कर राजा लुई सोलहवें को बंदी बना लिया। इसके बाद नए चुनाव कराए गए और 21 सितम्बर 1792 को कन्वेंशन ने राजतंत्र को समाप्त करके फ्रांस को गणतंत्र घोषित कर दिया। राजा पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया और 21 जनवरी 1793 को उसे मृत्युदंड दे दिया गया। इस प्रकार फ्रांस में सदियों पुरानी राजशाही का अंत हो गया।
(i) 10 अगस्त 1792 को ट्यूलरी महल पर हमला हुआ।
(ii) राजा लुई XVI को बंदी बनाया गया।
(iii) 21 सितम्बर 1792 को राजतंत्र समाप्त हुआ।
(iv) फ्रांस गणतंत्र बना।
(v) राजा को 1793 में मृत्युदंड दिया गया।
29. जैकोबिन क्लब (Jacobin Club) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ जैकोबिन क्लब फ्रांसीसी क्रांति के समय का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक संगठन था। इसका नेतृत्व मैक्समिलियन रोबेस्प्येर ने किया। इस क्लब के अधिकांश सदस्य छोटे दुकानदार, कारीगर, मजदूर तथा निम्न वर्ग के लोग थे। ये लोग साधारण धारीदार पतलून पहनते थे और स्वयं को ‘साँ कुलॉत’ (Sans-Culottes) कहते थे, ताकि वे कुलीन वर्ग से अपनी अलग पहचान बना सकें। जैकोबिन क्लब ने राजतंत्र को समाप्त करने, गणतंत्र की स्थापना करने तथा सामाजिक समानता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फ्रांसीसी क्रांति के उग्र चरण का नेतृत्व इसी संगठन ने किया।
(i) जैकोबिन क्लब प्रमुख राजनीतिक संगठन था।
(ii) इसका नेतृत्व रोबेस्प्येर ने किया।
(iii) इसके सदस्य निम्न एवं मध्यम वर्ग से थे।
(iv) इसने राजतंत्र का विरोध किया।
(v) गणतंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
30. 10 अगस्त 1792 के विद्रोह का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 10 अगस्त 1792 को फ्रांस की जनता ने जैकोबिनों के नेतृत्व में ट्यूलरी महल पर आक्रमण किया। उस समय युद्ध, महँगाई, खाद्यान्न संकट तथा राजा की नीतियों के कारण जनता में भारी असंतोष था। विद्रोहियों ने महल पर कब्ज़ा कर लिया और राजा लुई सोलहवें को बंदी बना लिया। इसके बाद नई राष्ट्रीय सभा के चुनाव कराए गए, जिसमें 21 वर्ष से अधिक आयु के सभी पुरुषों को मतदान का अधिकार दिया गया। इस विद्रोह ने फ्रांस में राजशाही के अंत का मार्ग प्रशस्त किया तथा लोकतांत्रिक शासन की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
(i) विद्रोह 10 अगस्त 1792 को हुआ।
(ii) ट्यूलरी महल पर हमला किया गया।
(iii) राजा को बंदी बना लिया गया।
(iv) नए चुनाव कराए गए।
(v) इस विद्रोह से राजतंत्र के अंत का मार्ग प्रशस्त हुआ।
31. कन्वेंशन (Convention) क्या था? इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ लिखिए।
उत्तर ⇒ 10 अगस्त 1792 के विद्रोह के बाद फ्रांस में नए चुनाव कराए गए और नव-निर्वाचित राष्ट्रीय सभा को कन्वेंशन (Convention) कहा गया। यह फ्रांस की पहली ऐसी सभा थी, जिसने 21 सितम्बर 1792 को राजतंत्र को समाप्त कर फ्रांस को गणतंत्र घोषित किया। कन्वेंशन का उद्देश्य देश में लोकतांत्रिक शासन स्थापित करना और क्रांति के आदर्शों को लागू करना था। इसी सभा ने राजा लुई सोलहवें पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें मृत्युदंड दिया। कन्वेंशन ने सामंती व्यवस्था को समाप्त करने तथा गणतांत्रिक शासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) कन्वेंशन नई राष्ट्रीय सभा थी।
(ii) 21 सितम्बर 1792 को फ्रांस को गणतंत्र घोषित किया।
(iii) राजतंत्र का अंत किया गया।
(iv) राजा पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया।
(v) लोकतांत्रिक शासन की नींव मजबूत हुई।
32. फ्रांस में गणतंत्र (Republic) की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर ⇒ 1792 में फ्रांस युद्ध, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा था। जनता का विश्वास राजा लुई सोलहवें से समाप्त हो चुका था। 10 अगस्त 1792 को ट्यूलरी महल पर आक्रमण कर राजा को बंदी बना लिया गया। इसके बाद नए चुनाव हुए और कन्वेंशन का गठन किया गया। 21 सितम्बर 1792 को कन्वेंशन ने राजतंत्र को समाप्त कर फ्रांस को गणतंत्र घोषित कर दिया। गणतंत्र का अर्थ था कि अब देश का शासन वंशानुगत राजा के बजाय जनता के प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होगा। यह फ्रांसीसी क्रांति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।
(i) 21 सितम्बर 1792 को गणतंत्र की स्थापना हुई।
(ii) राजतंत्र समाप्त कर दिया गया।
(iii) जनता के प्रतिनिधियों द्वारा शासन प्रारम्भ हुआ।
(iv) कन्वेंशन ने यह निर्णय लिया।
(v) लोकतंत्र को बढ़ावा मिला।
33. राजा लुई सोलहवें को मृत्युदंड क्यों दिया गया?
उत्तर ⇒ फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना के बाद राजा लुई सोलहवें पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया। उन पर आरोप था कि वे गुप्त रूप से प्रशा और ऑस्ट्रिया के शासकों से संपर्क बनाए हुए थे तथा फ्रांसीसी क्रांति को विफल करने का प्रयास कर रहे थे। कन्वेंशन ने उनके विरुद्ध मुकदमा चलाया और उन्हें दोषी पाया। इसके बाद 21 जनवरी 1793 को पेरिस में गिलोटिन द्वारा उनका सिर काटकर मृत्युदंड दिया गया। कुछ समय बाद रानी मेरी एन्तोआनेत को भी मृत्युदंड दिया गया। इस घटना ने फ्रांस में राजशाही के अंत को स्थायी बना दिया।
(i) राजा पर देशद्रोह का आरोप लगा।
(ii) कन्वेंशन ने मुकदमा चलाया।
(iii) 21 जनवरी 1793 को मृत्युदंड दिया गया।
(iv) गिलोटिन का प्रयोग किया गया।
(v) राजशाही का अंत स्थायी हो गया।
34. आतंक का युग (Reign of Terror) क्या था?
उत्तर ⇒ 1793 से 1794 के बीच का समय फ्रांसीसी इतिहास में आतंक का युग (Reign of Terror) कहलाता है। इस काल में जैकोबिन नेता मैक्समिलियन रोबेस्प्येर के नेतृत्व में कठोर शासन स्थापित किया गया। गणतंत्र के विरोधियों, कुलीनों, पादरियों तथा अन्य राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार कर क्रांतिकारी न्यायालय में मुकदमा चलाया जाता था। दोषी पाए जाने पर उन्हें गिलोटिन द्वारा मृत्युदंड दिया जाता था। सरकार ने वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित कीं तथा राशन व्यवस्था लागू की। रोबेस्प्येर की कठोर नीतियों के कारण अंततः जनता और उसके सहयोगियों का समर्थन भी समाप्त हो गया।
(i) आतंक का युग 1793–1794 तक चला।
(ii) इसका नेतृत्व रोबेस्प्येर ने किया।
(iii) विरोधियों को कठोर दंड दिया गया।
(iv) गिलोटिन का व्यापक उपयोग हुआ।
(v) अंत में रोबेस्प्येर का पतन हुआ।
35. मैक्समिलियन रोबेस्प्येर (Maximilien Robespierre) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ मैक्समिलियन रोबेस्प्येर फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख नेताओं में से एक तथा जैकोबिन क्लब के सबसे प्रभावशाली नेता थे। आतंक के युग में उन्होंने फ्रांस का शासन संभाला। उनका उद्देश्य गणतंत्र की रक्षा करना तथा क्रांति के विरोधियों को समाप्त करना था। उन्होंने मूल्य नियंत्रण, राशन व्यवस्था तथा सामाजिक समानता से जुड़े कई सुधार लागू किए। परंतु उनकी कठोर दंड नीति के कारण हजारों लोगों को गिलोटिन द्वारा मृत्युदंड दिया गया। धीरे-धीरे उनके अपने सहयोगी भी उनके विरोधी बन गए। जुलाई 1794 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और अगले दिन गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया, जिससे आतंक के युग का अंत हो गया।
(i) रोबेस्प्येर जैकोबिन क्लब के नेता थे।
(ii) उन्होंने आतंक के युग में शासन किया।
(iii) कठोर दंड नीति अपनाई।
(iv) अनेक सुधार भी लागू किए।
(v) जुलाई 1794 में उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
36. आतंक के युग में रोबेस्प्येर द्वारा किए गए सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ आतंक के युग (1793–1794) में रोबेस्प्येर ने फ्रांस में कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और मजदूरी पर नियंत्रण लगाया ताकि गरीब लोगों को राहत मिल सके। राशन व्यवस्था लागू की गई तथा मांस और रोटी जैसी वस्तुओं की बिक्री पर निगरानी रखी गई। किसानों को अपनी उपज सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर बेचने के लिए कहा गया। सभी नागरिकों के लिए समानता पर बल दिया गया तथा कुलीन वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त किए गए। हालांकि इन सुधारों के साथ कठोर दंड नीति भी अपनाई गई, जिसके कारण जनता में असंतोष बढ़ गया और अंततः रोबेस्प्येर का पतन हो गया।
(i) आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित की गईं।
(ii) राशन व्यवस्था लागू की गई।
(iii) मजदूरी पर भी नियंत्रण रखा गया।
(iv) समानता पर विशेष बल दिया गया।
(v) कठोर नीतियों के कारण उनका पतन हुआ।
37. गिलोटिन (Guillotine) क्या था?
उत्तर ⇒ गिलोटिन फ्रांसीसी क्रांति के दौरान मृत्युदंड देने का एक विशेष यंत्र था। इसमें एक भारी और तेज धार वाला ब्लेड ऊपर से गिराकर अपराधी का सिर काट दिया जाता था। इस यंत्र का उपयोग आतंक के युग में बड़े पैमाने पर किया गया। राजा लुई सोलहवें, रानी मेरी एन्तोआनेत तथा हजारों अन्य लोगों को इसी यंत्र द्वारा मृत्युदंड दिया गया। उस समय इसे सभी अपराधियों के लिए समान दंड का प्रतीक माना जाता था। हालांकि बाद में यह आतंक और क्रूरता का प्रतीक बन गया तथा फ्रांसीसी क्रांति के सबसे विवादास्पद पहलुओं में गिना जाने लगा।
(i) गिलोटिन मृत्युदंड देने का यंत्र था।
(ii) इसमें तेज धार वाला ब्लेड प्रयोग होता था।
(iii) आतंक के युग में इसका व्यापक उपयोग हुआ।
(iv) राजा लुई XVI को भी इसी से मृत्युदंड दिया गया।
(v) यह बाद में आतंक का प्रतीक बन गया।
38. महिलाओं की भूमिका फ्रांसीसी क्रांति में क्या थी?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अनेक राजनीतिक क्लबों की स्थापना की तथा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया। महिलाओं ने रोटी की बढ़ती कीमतों और महँगाई के विरोध में प्रदर्शन किए तथा अक्टूबर 1789 में हजारों महिलाओं ने वर्साय तक मार्च किया। उन्होंने शिक्षा, रोजगार तथा मतदान के अधिकार की भी माँग की। यद्यपि उन्हें तत्काल मतदान का अधिकार नहीं मिला, फिर भी उनके आंदोलनों ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी। बाद के वर्षों में महिलाओं के अधिकारों के विकास में फ्रांसीसी क्रांति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
(i) महिलाओं ने क्रांति में सक्रिय भाग लिया।
(ii) उन्होंने राजनीतिक क्लब बनाए।
(iii) वर्साय मार्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(iv) समान अधिकारों की माँग की।
(v) महिला अधिकार आंदोलन को नई दिशा मिली।
39. ओलांप द गूज (Olympe de Gouges) कौन थीं?
उत्तर ⇒ ओलांप द गूज फ्रांस की प्रसिद्ध लेखिका एवं महिला अधिकारों की समर्थक थीं। उन्होंने ‘महिला एवं महिला नागरिक के अधिकारों की घोषणा’ (Declaration of the Rights of Woman and the Female Citizen) नामक दस्तावेज़ प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने महिलाओं के लिए पुरुषों के समान राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों की माँग की। उन्होंने मतदान का अधिकार, सार्वजनिक पदों पर अवसर तथा समान शिक्षा का समर्थन किया। उनके विचार उस समय के शासकों को स्वीकार नहीं थे। परिणामस्वरूप 1793 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और गिलोटिन द्वारा मृत्युदंड दे दिया गया। आज उन्हें महिला अधिकार आंदोलन की अग्रणी नेता माना जाता है।
(i) ओलांप द गूज महिला अधिकारों की समर्थक थीं।
(ii) उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की घोषणा लिखी।
(iii) समान अधिकारों की माँग की।
(iv) 1793 में उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
(v) वे महिला आंदोलन की प्रेरणास्रोत हैं।
40. फ्रांसीसी क्रांति का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव केवल फ्रांस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे विश्व पर पड़ा। इस क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को लोकप्रिय बनाया। यूरोप तथा अन्य देशों में लोकतंत्र, राष्ट्रवाद और मानवाधिकारों के आंदोलनों को नई प्रेरणा मिली। सामंती व्यवस्था और निरंकुश राजशाही के विरुद्ध संघर्ष तेज हुआ। अनेक देशों ने संविधान आधारित शासन व्यवस्था अपनाई और नागरिक अधिकारों को महत्व दिया। भारत सहित विश्व के कई स्वतंत्रता आंदोलनों पर भी फ्रांसीसी क्रांति का गहरा प्रभाव पड़ा। इसलिए इसे आधुनिक विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण क्रांतियों में गिना जाता है।
(i) स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का प्रसार हुआ।
(ii) लोकतंत्र को बढ़ावा मिला।
(iii) राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई।
(iv) मानवाधिकारों का विकास हुआ।
(v) विश्व के अनेक आंदोलनों को प्रेरणा मिली।
41. फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम फ्रांस ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुए। इस क्रांति ने फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र और सामंती व्यवस्था का अंत कर लोकतांत्रिक शासन की नींव रखी। नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समान अधिकार प्राप्त हुए। चर्च और कुलीन वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए। राष्ट्रवाद की भावना को बल मिला तथा संविधान आधारित शासन व्यवस्था का विकास हुआ। इस क्रांति के आदर्शों ने यूरोप, अमेरिका और एशिया के अनेक देशों में स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया। आधुनिक लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनसत्ता की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने में फ्रांसीसी क्रांति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
(i) निरंकुश राजतंत्र का अंत हुआ।
(ii) सामंती व्यवस्था समाप्त हुई।
(iii) लोकतंत्र और संविधान को बढ़ावा मिला।
(iv) नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई।
(v) विश्व के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा मिली।
42. फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों (स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व) की व्याख्या कीजिए।
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति का मूल आधार स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और बंधुत्व (Fraternity) था। स्वतंत्रता का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिले। समानता का अर्थ है कि सभी नागरिक कानून की दृष्टि में बराबर हों तथा किसी के साथ जन्म, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव न किया जाए। बंधुत्व का अर्थ है कि समाज के सभी लोग परस्पर सहयोग, प्रेम और भाईचारे की भावना से रहें। ये तीनों आदर्श आधुनिक लोकतंत्र और मानवाधिकारों के आधार स्तंभ माने जाते हैं तथा आज भी विश्व के अनेक देशों के संविधान में इनका महत्व दिखाई देता है।
| आदर्श | अर्थ |
|---|---|
| स्वतंत्रता | विचार एवं जीवन की आज़ादी |
| समानता | सभी नागरिक कानून के समक्ष समान |
| बंधुत्व | आपसी प्रेम, सहयोग एवं भाईचारा |
(i) स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
(ii) समानता सामाजिक न्याय का आधार है।
(iii) बंधुत्व सामाजिक एकता को बढ़ाता है।
(iv) ये लोकतंत्र के मूल सिद्धांत हैं।
(v) आज भी इनका वैश्विक महत्व है।
43. फ्रांसीसी क्रांति आधुनिक लोकतंत्र की आधारशिला क्यों मानी जाती है?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति ने यह सिद्ध किया कि शासन की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है। इस क्रांति के बाद निरंकुश राजतंत्र के स्थान पर संविधान आधारित शासन और प्रतिनिधि लोकतंत्र को महत्व मिला। नागरिकों के मौलिक अधिकारों को मान्यता दी गई तथा कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत स्थापित हुआ। सत्ता के विभाजन, जनसत्ता और मानवाधिकार जैसे विचारों को व्यापक स्वीकार्यता मिली। बाद में अनेक देशों ने इन्हीं सिद्धांतों को अपनाकर अपने संविधान तैयार किए। इसलिए फ्रांसीसी क्रांति को आधुनिक लोकतंत्र की आधारशिला कहा जाता है।
(i) जनता की सर्वोच्चता स्थापित हुई।
(ii) संविधान आधारित शासन विकसित हुआ।
(iii) नागरिक अधिकारों को मान्यता मिली।
(iv) लोकतांत्रिक संस्थाएँ मजबूत हुईं।
(v) आधुनिक लोकतंत्र का विकास हुआ।
44. फ्रांसीसी क्रांति से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति हमें सिखाती है कि अन्याय, असमानता और निरंकुश शासन अधिक समय तक टिक नहीं सकते। जब जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, तो वह अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर परिवर्तन ला सकती है। यह क्रांति समानता, स्वतंत्रता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के महत्व को स्पष्ट करती है। साथ ही यह भी सीख देती है कि किसी भी परिवर्तन में जनता की भागीदारी आवश्यक होती है। वर्तमान समय में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, संविधान का सम्मान तथा सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए फ्रांसीसी क्रांति प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
(i) अन्याय का विरोध करना चाहिए।
(ii) लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए।
(iii) सभी नागरिकों के अधिकार समान हैं।
(iv) सामाजिक न्याय आवश्यक है।
(v) जागरूक नागरिक ही राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं।
45. फ्रांसीसी क्रांति का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर ⇒ फ्रांसीसी क्रांति विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। इसने फ्रांस की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए। सामंतवाद और निरंकुश राजशाही का अंत हुआ तथा लोकतांत्रिक शासन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों ने विश्वभर में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को नई दिशा दी। यद्यपि क्रांति के दौरान हिंसा और आतंक का दौर भी देखने को मिला, फिर भी इसके सकारात्मक प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण रहे। इस कारण फ्रांसीसी क्रांति को आधुनिक युग के इतिहास की एक महान क्रांति माना जाता है।
(i) यह विश्व इतिहास की महान क्रांति थी।
(ii) लोकतंत्र को नई दिशा मिली।
(iii) सामंतवाद का अंत हुआ।
(iv) मानवाधिकारों को बढ़ावा मिला।
(v) आधुनिक विश्व पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
More Class 9 History Revision Notes
| Chapter 1: फ्रांसीसी क्रान्ति |
| Chapter 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रान्ति |
| Chapter 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय |
| Chapter 4: वन्य-समाज और उपनिवेशवाद |